आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानो से इंटेलीजेंट हो जाये तब?

पिछली पोस्ट से उठा एक सवाल है की "मशीनें हमें क्यों गुलाम बनाएगी, उन्हें हमसे क्या चाहिए होगा, अगर वो हमसे ज्यादा इंटेलीजेंट हो जाएंगी तब ?"
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तो इसके कई जवाब हैं, और सबसे सिंपल जवाब है की उन्हें हमसे कुछ नहीं चाहिए हो तब भी उनकी हमारी लड़ाई रहेगी इसपर की हम दोनों को ही पृथ्वी के नेचुरल रिसोर्सेज चाहिए हैं, और ये किसे कितने मिलें इसपर लड़ाई होगी। जैसे की हुमंस भी तो आपस में क्यों लड़ते हैं ? रिसोर्सेज के लिए ही, किसी भी देश को क्यों बर्बाद किया जाता है ? रिसोर्सेज के लिए ही, इराक़ में तेल ना होता तो क्यों ही अमेरिका वहाँ जाता ?

इसलिए मशीनों के पास हमारा कोई इस्तेमाल नहीं भी होता तो भी वो हमें गुलाम बनाएंगी हमसे ताकतवर होते ही, क्यूंकि हम उन्हें रोक सकते हैं, और कोई भी इंटेलीजेंट बीइंग रोका जाना पसंद नहीं करता। 
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दूसरा ये की हमने कितने ही जानवरों को Domesticate किया हुआ है अपने फायदे के लिए,
हमने नयी नस्लें तक बना दी है क्रॉस ब्रीडिंग्स के जरिये जानवरों की। 
कुत्ते भेड़ियों से अलग हो गए, लैब के चूहे फार्म होने लगे, मीट के लिए बहुत से जानवरों की फार्मिंग होने लगी। और भी बहुत सी चीज़ें हैं। 
इंटेलिजेंस हमेशा ही एक्सप्लोइटेशन की तरफ बढ़ती है रिसोर्सेज के पूर्ण  इस्तेमाल के मद्देनज़र। 

और फिर इंसान पृथ्वी का सबसे इंटेलीजेंट जानवर है। 
तो हमारे दिमाग का इस्तेमाल मशीन अपने फायदे के लिए क्यों नहीं करना चाहेगी ?
हम लोग कितने ज्यादा प्रोडक्टिव हो सकते हैं अगर हम फिल्में ना देखें, सोशल मीडिया पर ना बहस करें, साहित्य में दिमाग ना खपाएं इत्यादि। 
इंसान को उसके पूरे पोटेंशियल पर इस्तेमाल करने के लिए उसे ऐसा ही करना होगा जैसे की सांड को बधिया करके बैल बनाया जाता है। 
इंसानी दिमाग की पीक अभी तक किसी ने नहीं देखि है, शायद मशीन देख पाएं। 

हम ये सोचते हैं की मशीन इंटेलीजेंट हो गयी तो हमारा दिमाग उनके काम का नहीं रहेगा। 
ऐसा नहीं है। 
हमारी इंटेलिजेंस अलग तरह की इंटेलिजेंस है, जिसको के डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता। 
शतरंज जोकि एक P प्रॉब्लम है, यानी के जिसे सीमित समय में सॉल्व किया जा सकता है,
एक समय पर 90s तक कोई सोच नहीं सकता था के कंप्यूटर इंसानों को शतरंज में हरा सकता है। 
लेकिन अब ये हाल है की इंसान कभी भी कंप्यूटर से शतरंज में नहीं जीत सकता। 
लेकिन,
अभी भी बहुत से ऐसे मैच देखे गए हैं, जिसमे की इंसान की कुछ चालों को कंप्यूटर नहीं समझ पाया और वो मैच जीतने वाली चालें साबित हुई। 
स्टॉकफिश जोकि शतरंज का सबसे बढ़िया इंजन था उसके सामने जब गूगल ने अल्फाजीरो निकाला तो स्टॉकफिश हार गया। 
और इंसानों की कई चालें ऐसी हैं जो इन दोनों ही इंजिन्स की पहुँच से बाहर पाई गयी है कई मैचेस में। 

इसलिए मशीन हमसे ज्यादा ताकतवर और ज्यादा इंटेलीजेंट हो भी जाएंगी, तो भी जो हमारी आर्गेनिक इंटेलिजेंस है वो मशीनी इंटेलिजेंस से अलग रहेगी, और उसकी अपनी वैल्यू रहेगी, जिसका के इस्तेमाल मशीनें करना चाहेंगी।

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